सोमवार, 19 नवंबर 2018

धर्म की छाँव दिल्ली मे पांव-

धर्म की छांव व दिल्ली मे पांव जि हां ठीक पढ़ा आप ने जब युद्ध के समय खुद को बचाने के लिए ढाल का सहारा लिया जाता अ रहा है ।ऐसे ही बदलते समय के साथ व बदलते राजनैतिक वारो से बचने के लिए धर्म का सहरा ले कर युद्ध इस राजनैतिक युद्ध को जितना आसन तो हो ही जाता है जब करोड़ो लोगो की भावनाएं धर्म के साथ जुड़ी हो,साथ मे लोकतंत्र की सबसे बड़े मंदिर की सुख सुबिधायें भी फ्री मे ही भोगने के अधिकारी हो जातें है। राहत की आश मे बैठे किसान,बेरोजगार,नवयुआ,मजदूर,आदि के भावनाओं के साथ खेलना आसान होता है,किन्तु इस लाचारी को झेलना कितना मुश्किल होता है,ये कोई किसान जिसकी पूरी लागत ही किसी प्राकृतिक आपदा मे तहस-नहस हो जाती है,बेरजगरी का अलं उन बेरोजगारों को ही पता होगा जिसकी तैयारी करते-करते ओवर एज हो गए हों। किन्तु युद्धों के समय जिस ढाल का उपयोग होता था उस समय जितने के बाद ढ़ालो की अच्छी तरह से मेन-टेन करके रख जाता था। आज जिस धार्मिक मुद्दों पे चुनावी जंग जीती जाती है उन्हें और ही ज्वलंत बनाया है जिसके चलते दिल्ली का दरबार हासिल करना असांन हो जाता है। कितने गरीबों,मजदूरों,का कत्ल भी करके राजनेता अपने मंसूबों को हासिल करने मे जरा भी अफसोस नही करतें । दुर्गेश कुमार M.A.समाजशास्त्र।